कभी तिरे हाथ की लकीरों से गुजरा था ,
आईने को भी यकीं नहीं मेरा चेहरा था .
अब शब की सयाही मेरा हमसफ़र सही ,
कभी मेरा सूरज उठा था सुनहरा था .
अखबार हाथ में प्याली सा कांपे है ,
हादिसा बड़ा न हो पर डरा - डरा था .
सुनहरी शाम ने खिंची एक परछाई ,
वो दो बदन थे या इकहरा था .
नाग खजाने के आस पास दिखे ,
तितलियों पर वैसा पहरा था .
तेरे मलहम की दुकान बड़ी है मगर ,
वो चोट पुरानी थी , वो घाव हरा था .
हर शब्द का हमारा आपका अनुभव अलग है . शब्द के अर्थ हमारे अनुभव के अनुसार हमें सुख-दुःख संताप पीड़ा आह्लाद आनंद शांति द्वेष घृणा प्रेम जैसे उदगार देते हैं - शब्द और अर्थ .मेरे अनुभव और अर्थ का विहंगम . मेरे शब्दों का सफर .
12 अप्रैल 2010
फेहरिश्त
राजा के हाथों में है -
एक फेहरिश्त .
फेहरिश्त में हैं नाम -
कुछ बड़े , कुछ छोटे ,
कुछ लम्बे , कुछ नाटे,
कुछ असली , कुछ खोटे,
कुछ ऊपर , कुछ नीचे ,
कुछ ढीले , कुछ खींचे ,
कुछ खुले , कुछ मींचे .
कुछ पहचाने - कुछ अनजाने .
कुछ जागे, कुछ अनमने .
फेहरिस्त में नाम -
घटते हैं , बढ़ते हैं .
कटते हैं , जुड़ते हैं .
फेहरिस्त में शामिल नाम
चाहते हैं -
दौड़ना - चाबुक लिए किले की प्राचीर पर .
बैठना - दरबार में .
पहुंचना- ख्वाबगाह में .
झुकना - कोर्निश में .
दबाना - अर्जी .
कानाफूसी - फर्जी .
पुतना - रंगमहल में , वार्निश में .
जुड़ना - लगान वसूली से. जोर से - जबरदस्ती से .
कारिंदे से , महाजन से .
महँगी से , सस्ती से .
घर से , बाज़ार से .
रुक्का लिए , खजाने की ताकीद पर .
फेहरिस्त में शामिल नाम ,
बनना चाहते हैं - ' राजाज्ञा " .
डराना - ' प्रजा ".
फेहरिस्त के नाम चाहते हैं
मिटाना - दूसरे सब नाम , काँट- छाँट.
देना - राजा की डांट.
धकेलना - बाकि सब नाम ,
फेहरिस्त के बाहर. हाशिये पर .
राजा की फेहरिस्त -
लम्बी हो ,
छोटी हो ,
असल हो ,
खोटी हो .
वास्तव में एक शतरंज है .
तुम एक नाम हो , गोटी हो .
खेल - जहाँ - प्यादे से पिट जाये वजीर ,
लुटेरे का नाम निकले फकीर .
जहाँ हर चाल सियासत हो ,
जहाँ बेगम की बादशाहत हो .
जहाँ हाथी हो ,
ऊंट हो ,
घोड़े हों .
कुछ जियादा हों , थोडें हों .
सबकी एक चाल हो ,
सब मालामाल हों .
कुछ बंद कमरों में हो ,
कुछ सरे आम हो .
और खुद चाहता हो बादशाह
की
इतिहास की फेहरिस्त में - उसका नाम
सबसे ऊपर
सुनहरे हर्फों में हो .
ताकि सनद रहे .
पर ,
इतिहास राजा नहीं लिखता ,
वक्त लिखता है .
उस पर किसका चलता है ?
- गुवाहाटी १८ अक्तूबर , २०००
एक फेहरिश्त .
फेहरिश्त में हैं नाम -
कुछ बड़े , कुछ छोटे ,
कुछ लम्बे , कुछ नाटे,
कुछ असली , कुछ खोटे,
कुछ ऊपर , कुछ नीचे ,
कुछ ढीले , कुछ खींचे ,
कुछ खुले , कुछ मींचे .
कुछ पहचाने - कुछ अनजाने .
कुछ जागे, कुछ अनमने .
फेहरिस्त में नाम -
घटते हैं , बढ़ते हैं .
कटते हैं , जुड़ते हैं .
फेहरिस्त में शामिल नाम
चाहते हैं -
दौड़ना - चाबुक लिए किले की प्राचीर पर .
बैठना - दरबार में .
पहुंचना- ख्वाबगाह में .
झुकना - कोर्निश में .
दबाना - अर्जी .
कानाफूसी - फर्जी .
पुतना - रंगमहल में , वार्निश में .
जुड़ना - लगान वसूली से. जोर से - जबरदस्ती से .
कारिंदे से , महाजन से .
महँगी से , सस्ती से .
घर से , बाज़ार से .
रुक्का लिए , खजाने की ताकीद पर .
फेहरिस्त में शामिल नाम ,
बनना चाहते हैं - ' राजाज्ञा " .
डराना - ' प्रजा ".
फेहरिस्त के नाम चाहते हैं
मिटाना - दूसरे सब नाम , काँट- छाँट.
देना - राजा की डांट.
धकेलना - बाकि सब नाम ,
फेहरिस्त के बाहर. हाशिये पर .
राजा की फेहरिस्त -
लम्बी हो ,
छोटी हो ,
असल हो ,
खोटी हो .
वास्तव में एक शतरंज है .
तुम एक नाम हो , गोटी हो .
खेल - जहाँ - प्यादे से पिट जाये वजीर ,
लुटेरे का नाम निकले फकीर .
जहाँ हर चाल सियासत हो ,
जहाँ बेगम की बादशाहत हो .
जहाँ हाथी हो ,
ऊंट हो ,
घोड़े हों .
कुछ जियादा हों , थोडें हों .
सबकी एक चाल हो ,
सब मालामाल हों .
कुछ बंद कमरों में हो ,
कुछ सरे आम हो .
और खुद चाहता हो बादशाह
की
इतिहास की फेहरिस्त में - उसका नाम
सबसे ऊपर
सुनहरे हर्फों में हो .
ताकि सनद रहे .
पर ,
इतिहास राजा नहीं लिखता ,
वक्त लिखता है .
उस पर किसका चलता है ?
- गुवाहाटी १८ अक्तूबर , २०००
11 अप्रैल 2010
कुछ कदम
कुछ कदम हम आपके साथ चले ,
और कुछ दिन ये मुलाकात चले .
आज शाम से मौसम उदास है ,
चलो कहीं बैठें कुछ बात चले .
उन्ही खतों को बार-बार पढना,
पुरानी शराब थी कई जाम चले .
ये शहर नया , ये लोग नए ,
नया तखल्लुस हो , नया नाम चले .
मुहब्बत में एक दिन ऐसा हो ,
वो बन संवर के मेरे साथ चले .
बेटियां जिंदगी का सरमाया हैं ,
कोई सबब है की कायनात चले .
बहुत दिनों से जुनूं काबिज है ,
दौरे दीवानगी गजले ख्याल चले .
और कुछ दिन ये मुलाकात चले .
आज शाम से मौसम उदास है ,
चलो कहीं बैठें कुछ बात चले .
उन्ही खतों को बार-बार पढना,
पुरानी शराब थी कई जाम चले .
ये शहर नया , ये लोग नए ,
नया तखल्लुस हो , नया नाम चले .
मुहब्बत में एक दिन ऐसा हो ,
वो बन संवर के मेरे साथ चले .
बेटियां जिंदगी का सरमाया हैं ,
कोई सबब है की कायनात चले .
बहुत दिनों से जुनूं काबिज है ,
दौरे दीवानगी गजले ख्याल चले .
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