29 मार्च 2010

घर जला है

लोग अब  पहरावों से पहचाने जाते हैं ,
पहरावा न तेरा भला है , न मेरा भला है .
अब तक धुआं है , धुआं है, धुआं है ,
न जाने किसका घर जला है .
तू नहीं आईना चटकने का सबब ,
मैंने देखा है एक चेहरा जला है .
मै सच जानता हूँ मै सच नहीं कहूँगा ,
तुम्हारा ही नहीं ये मेरा भी फैसला है .
वह जरुरत से ज्यादा भला है ,
सिर्फ तुमने नहीं उसे मैंने भी छला है .
उन्हें जब देखा मुस्कराते देखा ,
उनका हर चेहरा इतना भला है .

2 टिप्‍पणियां:

  1. "वह जरुरत से ज्यादा भला है ,
    सिर्फ तुमने नहीं उसे मैंने भी छला है"...बढिया लिखा जनाब......"

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  2. वह जरुरत से ज्यादा भला है ,
    सिर्फ तुमने नहीं उसे मैंने भी छला है .
    duniyaa kaa shaayad yahi dastoor hai , bahut yathaarath panktiyaan

    उत्तर देंहटाएं

आपके समय के लिए धन्यवाद !!

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