8 जनवरी 2011

चन्द तस्वीरें

(१)  
सिर्फ एक   नाम  या 
लिफाफे पर लिखा पता 
तुमसे क्या छिपा ?
डाला हुआ बैरंग ख़त 
उस पते ने लौटा दिया .
(२) 
बहुत कोशिशों के बाद 
याद नहीं आया 
पहचान  नहीं पाया 
स्मृतियों के जंगल में भटकता चेहरा 
जंगल से गुजरती कोई भी पगडंडी 
वापिस नहीं ले जा सकी 
उस मोड़ तक .
(३)
ये शहर 
वो मकान 
बहुत अपरिचित लगे 
बच्चे जो हो गए थे अब बूढ़े .
(४)
कोई नहीं खेलता 
टूटे खिलौनो  से
किसी दोस्त का उपहार हैं 
बचपन का प्यार है 
कोई नहीं फेंकता 
टूटे खिलौने .
(५)  
शहर फ़ैल गया है 
विस्थापित हो गए हैं 
दोस्तों के मकान 
तालाब के किनारे शाम 
अकेले ही रात में ढल गयी .

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी क्षणिकाएं हैं -
    बधाई एवं शुभकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं

आपके समय के लिए धन्यवाद !!

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