30 जून 2010

मटमैला हो गया जीवन

बहुत  दिनों  के  बाद 
एक भूली बिसरी याद 
जीवन की सरिता को खंगाल गयी ,
मटमैला हो गया जीवन .
विस्मृत स्मृतियों की भीनी फुहार 
भिंगो गयी मन की कंदराओं के द्वार ;
दबी अनुभूतियाँ , अनकहे संवाद ,
छिन्न-भिन्न कर टूट गया बाँध ;
कट गए तटबंध  शिथिल,
विप्लव प्लावित  हुआ मन.
मटमैला हो गया जीवन  .
कर्पूर सी सहेजी स्मृतियाँ
औ ' चिरैय्या के चूजे ;
छोड़ गए तिनकों का घोसला,
चुग दाना उड़ गए गगन में ;
गोधूलि वेला में फंसा
अपने जाल निषाद यौवन .
मटमैला हो गया जीवन .
अब नहीं उगती कोंपले, बौराता वन, 
जलता पलाश से जंगल ;
पारस की तलाश में 
व्यय विनिमय सकल ;
थक गया पथिक , यात्रा अधूरी
शेष समर  विधवा क्रंदन .
मटमैला हो गया जीवन .

 

4 टिप्‍पणियां:

  1. जलता पलाश से जंगल ;
    पारस की तलाश में
    व्यय विनिमय सकल ;
    थक गया पथिक , यात्रा अधूरी
    शेष समर विधवा क्रंदन .
    मटमैला हो गया जीवन .

    शब्दावली और रचना दोनों आपकी कलम हुनर दिखाती हैं ......!!

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आपके समय के लिए धन्यवाद !!

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