8 जुलाई 2010

सतरंगी रे

नवीन किसलय कुञ्ज में 
वसंत बांसुरी की गूँज में 
विहंग कलरव , भ्रमर राग 
आरती माधुर्य स्वर-पुंज में  
गाओ राग 
जैजैवंती रे !
मनरंगी रे !!  
शंख स्वर , घंट निनाद बाजे
बाजे मृदंग , खर-ताल बाजे   
कर-ताल सुन , ओंकार धुन 
नाचे मयूर पंख पसार साजे
जैसे कोई 
सतरंगी रे !
मनरंगी रे !! 
कमर करधनी , चली मोरे अंगना
हाथों में मेहंदी , अली मोरे अंगना
कानों में झुमका , पाजेब खनका , 

धानी चुनर ,  हाथों में कंगना
बाजे चूड़ियाँ
पचरंगी रे !
मनरंगी रे !!

5 टिप्‍पणियां:

  1. बेनामी10/07/2010, 12:29:00 pm

    Very nice. Specially liked the rural tone.
    Anurag

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  2. Thank you for reading me.

    You write beautifully, happy to have discovered your writing.

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  3. भाई सब पढ़ी एक एक करके ... दो दिन से लगातार...

    उत्तर देंहटाएं

आपके समय के लिए धन्यवाद !!

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