11 अप्रैल 2011

कंक्रीट के जंगल

वर्षा  की प्रथम 
बूंदों का आगमन 
भीनी मिट्टी की सोंधी महक 
खो गयी कंक्रीट के जंगल में |
भीड़ भरे बागों में 
कोयल नहीं कूकती 
बजती सीटी 
बिकती मूंगफली 
खोमचेवालों की भीड़ में 
खो गयी तितली |
तालाब भर गये 
नदियों / नालों की 
कब्र पर खडी अट्टालिकाएं 
ढूँढती है सजाये रक्खे बैठकों में
मञ्जूषा में बंद नौकाओं के प्रतिमान 
रोती जब प्रकृति नियती पर हमारी |
बोनसाई के जंगल में 
यांत्रिक भालू , शेर , हाथी , बाघ 
सारे पक्षी और व्याघ्र 
और कदाचित मानव नस्ल का भी 
प्रादुर्भाव |

1 टिप्पणी:

  1. बोनसाई के जंगल में
    यांत्रिक भालू , शेर , हाथी , बाघ
    सारे पक्षी और व्याघ्र
    और कदाचित मानव नस्ल का भी
    प्रादुर्भाव |

    गंभीर रचना ......!
    आदमी को मयस्सर नहीं इन्सां होना ......!!

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आपके समय के लिए धन्यवाद !!

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