13 अप्रैल 2011

अब तक कदाचित

जलियांवाला बाग
नहीं एक तिथी
स्मृतिवन में
उकेर सहेजी गयी
एक वाक्यवीथि|
वाहे गुरुजी दा खालसा
वाहे गुरुजी दी फ़तेह
बैसाखी के रंग
पञ्च प्यारों के संग
अमृत छका |
तेरह अप्रैल
गुमनाम का जन्मदिन
अब तक कदाचित
एक नया परिचय
निश्चित |

3 टिप्‍पणियां:

  1. क्या बात है ! यहाँ तो फुर्सत में आना होगा गुरुदेव ! यहाँ तो कोई 'अपने' टाइप का लगता है !

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आपके समय के लिए धन्यवाद !!

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