13 अप्रैल 2011

सफ़ेद राजहंस

अब नहीं बची 
कोई वजह हमारे बीच 
बनाया था जो सेतु 
राम ने 
समुद्र में तैरते पत्थरों के साथ 
अब सब नर्मदा के गर्भ में 
तलहटी में बसे शिवलिंग |
काशी के चार द्वारों पर बैठे 
शहर कोतवाल 
काल भैरव |
जीवन नहीं काशी 
जो शिवजी के त्रिशूल की 
नोक पर बसा हो 
जीवन है -
शव  में अवस्थित बेताल 
जिसे ढोता है विक्रमादित्य 
और सफ़र में 
सुनाता है तरह - तरह के 
किस्से -कहानियां |
जिनका उत्तर जानकर भी नहीं देने पर 
हो जायेंगे सर के टुकड़े-टुकड़े |
क्यों धारण कर लेती है 
धरती विधवा की तरह 
हिमाच्छादित सफ़ेद वस्त्र 
जब निकल जाती है सब ऊष्मा 
और शरीर 
यौवन की ऊष्मा के बाद 
सफ़ेद केश |
अब नहीं बची कोई वजह 
हमारे बीच 
ना संबंधों का माधुर्य 
न साहचर्य 
एक पूरी तरह जली हुई रस्सी 
जिसमे अतीत के बंधनों के अवशेष 
सुरक्षित भले ही हों 
पर हथेली का दबाव 
तब्दील कर देगा राख में |
एक मुट्ठी  राख
और अस्थियों के अवशेष 
सब समेट लो 
कलश में 
शरीर ही तो नहीं 
अब लगाएगा डूबकी 
कलश 
खोल कर मुख 
समाहित हो जायेगा
धारा में |
लहरों पर सवार 
सफ़ेद राजहंस 
उड़ जायेंगे उस क्षण 
नभ में |
(  दोस्तों से पुनः क्षमा याचना सहित )

7 टिप्‍पणियां:

  1. samudra manthan ker kuch lana ise kahte hain... apni yah rachna vatvriksh ke liye bhejen rasprabha@gmail.com per tasweer parichay aur blog link ke saath

    उत्तर देंहटाएं
  2. एक अच्छी पोस्ट के लिए बधाई |
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  3. जीवन की सत्यता का बोध कराती बेहतरीन रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  4. लहरों पर सवार
    सफ़ेद राजहंस
    उड़ जायेंगे उस क्षण
    नभ में |

    आलौकिक ..दिव्य ..अनुभूति देती हुई ....
    निर्लिप्त ...विरक्त .....
    बहुत सुंदर रचना ......!!
    कई बार पढ़ने के बाद समझ आई |
    नम्र निवेदन है ....कुछ कठिन शब्दों का अर्थ भी साथ में दिया करें .

    उत्तर देंहटाएं
  5. आशा , वंदना , रश्मिप्रभा , और अनुपमा जी -
    आप सब जैसे सुधी पाठकों से प्रेरणा मिलती है |
    कविता जीवन के सभी पक्षों पर निगाह डालती है |
    बहुत से पाठकों ने रचनाओं में उदासी की बहुलता पर शिकायत की है |(क्षमा ज्ञापन कर ली थी )
    और शब्दों की दुरुहता पर आपके सुझावों पर भी ध्यान दूंगा |
    पर किन शब्दों पर तय नहीं हो पाया |

    उत्तर देंहटाएं
  6. जीवन है -
    शव में अवस्थित बेताल
    जिसे ढोता है विक्रमादित्य
    और सफ़र में
    सुनाता है तरह - तरह के
    किस्से -कहानियां |

    जीवन के प्रति गहन भाव लिए अद्भुत रचना ..

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत अर्थपूर्ण है ये तो ! पीछा करते करते आयी थी यहाँ ! सही जगह लगती है !

    उत्तर देंहटाएं

आपके समय के लिए धन्यवाद !!

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